TOP 20+ galib shayari,Heart touching Shayari in Hindi

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सवाल करते हो दुख देकर सवाल करते हो तुम भी वाली कमाल करते हो पूछ पूछ लिया हाल मेरा देख कर पूछ लिया हाल मेरा चलो कुछ तो मेरा ख्याल करते हो

 

शहरी दिल में यह उदासियां कैसी चेहरे दिल में जी उदासियां कैसी यह भी मुझसे सवाल करते हो े तो म मैं ने हीं तो मर नहीं सकते मर ना चाहे तो मर नहीं सकते तुम भी जीना मुहाल करते किस की मिसाल दूं तुमको अब किस किस की मिसाल दूं तुमको हर सितम करते हो,galib shayari,

 

अच्छा कालीफा नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं काम होता है शाम क्यों नजरों में पूछ उन परिंदों से हसीन का है जिनका घर नहीं होते

में ी मुट्ठी में लिए कब की कब्र की सोचता हूं गाली खाली इंसान जो मरते हैं तो उनका गुरुर कहां जाता चेहरे पर आती है रौनक और वह समझते हैं,galib shayari,

आपका स्वागत है जन्नत की हकीकत लेकिन हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन दिल के खुश रखने को ग़ालिब ये ख्याल अच्छा गालिब निकम्मा कर दिया इश्क ने गालिब निकम्मा कर दिया वरना हम भी आदमी थे काम के ग़ालिब यही भूल करता रहा उम्र भर ग़ालिब यही भूल करता रहा धूल चेहरे पर थी और आईना साफ करता

पर कौन ना मर जाए ए खुदा इस सादगी पर कौन ना मर जाए ए खुदा लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मेरे अरमां लेकिन फिर भी कम निकले

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से जो आ जाती है मुंह पर रौनक उनके देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक वह समझते हैं कि बीमार का हाल हुआ क्या है क्या है दिल ए नादां तुझे हुआ क्या है आखिर इस दर्द की दवा उम्मीद पर लोग कहते हैं जीते हैं उम्मीद पर,galib shayari,

 

अपना सा मुंह लेकर रह गए आईना देख अपना सा मुंह लेकर रह गए साहब को दिल न देने पर कितना गुरूर जोर नहीं आता इश्क पर जोर नहीं है यह वो आतिश ग़ालिब जो लगाए न लगे और बुझाए तुम आ फिर से उठा देते हैं जिंदगी में तो महफिल से उठा देते मर गए पर कौन उठाता है बुरा ना मान मानो ऐसा भी कोई अच्छा कहीं अच्छा

 

ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले रहेगा उसकी गर्दन पर निकले कूचे से हम निकले पर तो हम कहां पर जो हम निकले कोई उसको खत तो हमसे लिखवाए सुबह से काम कर सुबह से

 

देखेगी अपनों के हाथों में यह इस संग दिलों की दुनिया है चलना पलकों पर बिठाते हैं गिराने के लिए थी,galib shayari,

 

आशियाने की आंधियां जमाने की कोई समझ ना पाया आदत थी मुस्कुराने की इंसान घर बदलता है लिबास बदलता है रिश्ते बदलता है दोस्त बदलता है फिर भी परेशान क्यों रहता है क्योंकि वह खुद को नहीं बताता का ने ग़ालिब यही भूल करता रहा पर थी पर थी और आईना साफ रहा रहा

Mirza Ghalib shayari Dil ki

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बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम रखो तो सब साथ हैं गालिब वरना आंसुओं को तो आंखों में भी बना नहीं मिलती जन्मदिन की दुनिया है गालिब यहां पलकों पर बिठाया जाता है नजरों से गिराने की है,galib shayari,

 

इसकी मौत पर जमाना अफसोस करें जो तो गाली गालिब हर शक्स दुनिया में आता है मरने के लिए की खुशियां बनाए रखें

 

दुश्मन भले ही आगे निकल जाए कोई खुशियों के ठिकाने बहुत होंगे मगर हमारी बेचैनियों की वजह तुम हो,galib shayari,

 

हैं समझो तो खामोशी भी कहती है मैं ऐसे खामोश हूं और वह बरसों से बेखबर बात है बात है मोहब्बत में वरना एक लाश के लिए ताजमहल नहीं बनता है पूछता है पिंजरे में बंद परिंदों को ग़ालिब याद वही आते हैं जो उड़ जाते फ रहने का अंधा ज़

 

तुम्हें तनहा ना करते खाली फुर्सत नहीं से नहीं मोहताज होते है तुम कहीं और के मुसाफिर हो हमारा शहर तो बस रास्ते में आया था,galib shayari,

 

जताया नहीं करते वह अक्सर गुस्से में रोजा करते हैं बेहद ख्याल रखा करो तुम अपना मेरी आम सी जिंदगी में बहुत खास हो तुम

 

रात को मत आया करो मेरे सपनों में नींद खुलते ही हैं उससे नफरत हो जाती है कुछ लोग तो यूं चले गए जिंदगी था ही नहीं जिंदगी तो म को तुमको मस्जिद में देखकर ग़ालिब ऐसा भी क्या हुआ कि बार बार मोहब्बत करनी है तुमसे लेकिन इस बार हम

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आस्था तो मैं रोज हूं मगर खुश हुए जमाना हो गया इत्तेफाक से ही सही सबने दिखाएं चेहरे सब ने बदले हैं सामने सबके आए कैसे कह दूं कि बदले में कुछ ना मिला तब आप कोई छोटी चीज तो नहीं

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जी लो हर लम्हा बीत जाने से पहले लौट कर सिर्फ यादे आती है वक्त नहीं

jee lo har lamha bit jaane se pahale
laut kar sirph yaade aati hai vakt nahin

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दर्द मिन्नत कश्मीर दवा ना हुआ मैं ना अच्छा हुआ बुरा ना हुआ ना रूठने का डर है ना मनाने की कोशिश

dard minnat kashmir dava na hua main na achchha hua bura na Hua n rootha ne ka dar hai
Na Manane ki Koshish

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दिल तो अक्सर एक-दूसरे से भी जाया करते हैं अपनों ने ही सिखाया है वाले ने यहां कोई अपना नहीं है

dil to aksar ek-doosare se bhi jaaya karte hain apnon ne hi sikhaya hai
vaale ne yahan koi apna nahin hai

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सुकून की तलाश में हूं वाले ख्वाहिशें कब तक पूरी नहीं होती नाराजगी भी खूब स्टाइल वाले आदमी दिल और दिमाग दोनों में रहता है

sukon ki talash mein hon vale khvahishen kab tak pori
nahin hoti narajagi bhi khoob stail vaale aadami dil
aur dimaag donon mein rahata hai

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जो मौत से ना डरता था वह बच्चों से डर गया एक रात खाली हाथ जब मजदूर घर गया

कई रिश्तो को परखा मगर नतीजा एक ही निकला जरूरत ही सब कुछ है मोहब्बत कुछ भी नहीं

jo maut se na darta tha vah bachchon se dar gaya ek rat khali haath jab majadoor ghar gaya

kaye rishto ko parakh magar natija ek hi nikala jarorat hi sab kuchh hai mohabbat kuchh bhi nahin

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यह चंद दिन की दुनिया है गालिब यहां पलकों पर बिठाया जाता है नजरों से गिराने के लिए जिंदगी उसी की है जिसकी मौत पर जमाना अफसोस करें

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हैरान हूं तुझे मस्जिद में देखकर वाले ऐसा भी क्या होगा जो खुदा याद आ गया मुस्कान बनाए रखो तो सब साथ है ग़ालिब वरना आंसुओं को तो आंखों में भी मना नहीं मिलती

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लोग बेताब थे मिलने को मंदिर के पुजारी से हम दुआ लेकर आ गए बाहर बैठे भीकारी से कल सूरज से एक ही बात थी कि मैंने अगर बीच में कोई आ जाए तो ग्रहण लग ही जाता है

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यह सब पैर फिसला इल्जाम उसी चप्पल पर लगाया सब ने महीनों तक की जमीन और कांटों से बचाया जिसने कौन कहता है कि वक्त बहुत तेज हैं

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कभी किसी का इंतजार तो कर के देखो इश्क अधूरा रह जाए तो नाश करना सच्चा प्यार मुकम्मल नहीं होता हमारा होना भी फिर किस काम का है

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जब हमारे ना होने से किसी को कोई फर्क ना पड़े उठाकर कफन चेहरा मत दिखाना मैं  उससे भी तो पता चले कि जार का दीदार ना हो तो कैसा लगता है

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दुनिया में बेहतरीन इंसान वही है जो रूठ जाने पर भी एक छोटी सी मुस्कुराहट श्रीमान चाहिए उसके साथ रिश्ता अजीब सा है

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दर्द कोई भी हो याद उसी की आती है हंस-हंस कर जलाया करो उनको जिनको लगता है तुम उनके बिना रह नहीं सकती

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एक आखरी मुलाकात को बुलाया था उसने मैंने ना जाकर उस मुलाकात को बचा कर रख दिया

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कितना फर्क होता है शाम के अंधेरों में गाली पूछ उन परिंदों से जिनके घर नहीं होते मुझसे कहती है साथ रहूंगी सदा गाली बहुत प्यार करती है

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मुझसे उदासी मेरे मेरे बारे में कोई राय मत बनाना गाली मेरा वक्त भी बदलेगा और तेरी राय खैरात में मिली खुशी मुझे अच्छी नहीं लगती

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ग़ालिब मैं अपने दुखों में रहता हूं नवाबों की तरह हाथों की लकीरों पर मत जा ऐ ग़ालिब नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते

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बेवजह नहीं रोता इश्क में कोई गाली जिसे खुद से बढ़कर चाहो और रुलाता जरूर है मैं नादान था जो वफा को तलाश करता रहा गाली यह न सोचा कि एक दिन अपनी सास भी बेवफा हो जाएगी

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मुसाफिर कल भी था मैं मुसाफिर आज भी हूं कल अपनों की तलाश में था आज अपनी तलाश में हूं

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तोड़कर जोड़ ले हर चीज दुनिया की सब कुछ काबिल है मरम्मत है एतबार के सिवा आंखों से दूर दिल के करीब था मैं उसका और वह मेरा नसीब था

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न कभी मिला न जुदा हुआ रिश्ता हम दोनों का कितना अजीब था पहले सड़क कश्ती से उतरने वाले जमीन अक्सर किनारे से ही

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सकती है तमाशा देख रहे थे जो मेरे डूबने का अब मेरी तलाश में निकले हैं कश्तियां लेकर राहों में कौन आया गया कुछ पता नहीं उसको तलाश रहे हैं जो मिला नहीं

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मैं चुप रहा तो गलतफहमियां बड़ी उसने वह भी सुना है जो मैंने कहा आंखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा कश्ती के मुसाफिर ने समंदर नहीं देखा पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाल कोई बताओ जरा उसे मॉम हूं मैं उसने मुझे छू कर नहीं देखा

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कभी-कभी तो झलक पड़ती हैं यूं ही आंखें उदास होने का कोई सबक नहीं होता खुशबू की तरह आया तेज हवाओं में मांगा था जिसे हमने दिन-रात दुआओं में तुम नहीं आए मैं घर से नहीं निकला चांद बहुत रोया सावन की घटा हूं मैं

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बस के दुश्वार है हर काम का सोना बस की दुश्वार है हर काम का ना होना आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसान होना राज्य से होकर हुआ इंसान तो मिट जाता है

 

ना था कुछ तो खुदा था कुछ ना होता तो खुदा होता ना था कुछ तो खुदा था कुछ ना होता तो खुदा होता

 

यह ना थी हमारी क़िस्मत के विसाले यार होता यह ना थी हमारी क़िस्मत के विसाले यार होता अगर और जीते रहते यही इंतजार होता

 

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

 

उनके देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक उनके देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक वह समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है

 

हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन दिल के खुश रहने को गालिब ये ख्याल अच्छा है

 

किसी ने हमसे पूछा कैसे हो हम ने हंसकर कहा जिंदगी में गम है गम में दर्द है दर्द में मज़ा है और मज़े में हम हैं

वो रात दर्द और सितम की रात होगी जिस रात रुखसत उनकी बारात होगी

उठ जाता हूं मैं इस सोचकर नींद से अक्सर की एक गैर की बाहों में मेरी सारी कायनात होगी 

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