ghalib shayari|मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी हिंदी में vest new

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ghalib shayari|मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी हिंदी में vest new ghalib shayari, mirza ghalib shayari,mirza ghalib shayari in hindi,galib shayari रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल जब आंख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है वह बड़ा रहीमो करीब है मुझे यह सिफत भी आता करे तुझे भूलने की दुआ करूं तो मेरी दुआ में असर ना …

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