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साया था आंखों में आया था हमने दो बूंदों से मन भर लिया बार बार तो यूं होगा और थोड़ा सा सुकून होगा एक बार तो यूं होगा और थोड़ा सा सुकून होगा

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आतें हैं वक्त के साथ जाती है युवक वक्त के कोई गैर हो जाता है भर किसी को अपना समझना वही लड़की किसी लड़के को चाह कर भी नहीं भूल पाते इसका सीधा मतलब यह हुआ कि ना कहीं वह लड़का भी अपने दिमाग से नहीं निकाल पा रहा है साथ सोने से पहले जो जरूर सोच आज तक की साथ क्योंकि में सबसे अच्छी रहने की दो जगह दिल में रहो फिर दुआओं में

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एक ऐसा रिश्ता हुआ इसमें वफा का भला एक ऐसा रिश्ता हुआ इसमें वफा का भला तमाम उम्र में 246 की हाथ टूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते वक्त के साथ लम्हे नहीं तोड़ा करते

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ना दिल में कसक ना सर में जुनून होगा ता पने के सपने के टूट कर चकनाचूर हो जाने के बाद एक सपने के टूट कर चकनाचूर हो जाने के बाद दूसरा सपना देखने के हौसले का नाम जिंदगी है
कल का हलवा किया तुम्हारा था कल का हलवा किया तुम्हारा था आज की दास्तां हमारी है अपने साए से चौक जाते हैं हम अपने साए से छूट जाते हैं उम्र गुजारी है इस कदर तन्हा तो तेरे इश्क की छांव में जल जल कर मैं तेरे इश्क की छांव में जल जल कर काला ना पड़ जाऊं कहीं तू मुझे.हुस्न. की धूप. का. एक टुकड़ा एक

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तुझसे अब कुछ नहीं मांगता है कर के ले ने की आदत तेरी मंजूर नहीं है हालातों ने खोदी इस चेहरे की मुस्कान जहां भी जाते थे ला दिया करते .थे बेहद..लाचारी का आलम .था उस. वक्त. साहब. जब मालूम हुआ कि.. मैं मुलाकात आखरी है
झुक. जाते हैं जो लोग .आप की. खातिर किसी भी .हद तक वह सिर्फ. आपकी इज्जत ही नहीं ब्बल मोहब्बत भी करते हैं .मर्दानगी. औरत की .इज्जत लूटने. में नहीं बचाने. में है
हमदर्दी ना करो हमसे द्ध बढ़ हमदर्द है हजार खुशियां छीन वो कहते हैं

Gulzar poetry

फिर से लिखने का मन होता. है कभी-कभी अजीब सा सुकून होता है उस नींद में बुरी तरह से रोने के बाद आती है अल्फाज. अक्सर अधूरी ही रह जाते हैं .मोहब्बत में हर. शख्स किसी. ना .किसी. की चाहत .दिल में. दबाए. रखता है
संभल कर.. चलना दान यह इंसानों की बस्ती तो . रब को भी .आजमा लेते हैं
तेरी क्या हस्ती है पहन ले फिर दे उसे उतार हेलमेट सा हो गया है लोगों का किरदार फेर दो इन पन्नों पर ताकि धुल जाए स्याही सारी द गी
फिर से लिखने का मन होता है कभी-कभी अजीब सा सुकून होता है उस नींद में बुरी तरह से रोने के बाद आती है अल्फाज अक्सर अधूरी ही रह जाते.. हैं मोहब्बत में हर .शख्स किसी ना .किसी की चाहत दिल में दबाए रखता है

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बादशाह किसी की यादों में बर्बाद हो गए एक फूल खुशबू से आजाद हो गए महकते हुए फूल खुशबू से आजाद हो गए
जब जिंदगी बार बार मौका दे तो गलतियों को दोहराने की गलति कभी मत कीजी जिम्मेदारियों का जहैमुझ है मुझ पर रूठने और टूटने का हक नहीं है

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मोहब्बत तो हैमेसा इंक एक तारफा जो टोनो तरफ़ा से हओसे नसीप कहते हे

किसी ने कहा था मोहब्बत फूल जैसी है कदम  रुक गए आज जब फूलों को बाजार में बिकते देखा मोहब्बत की आज तक बस दो ही बातें अधूरी रही

शायरी गुलज़ार

मैं तुझे पाना पाया दूसरी तुम समझ ना पाए

 

इश्क   चोट का कुछ दिल पर असर हो तो सही दर्द कम हो या ज्यादा तो हो सही धोखा.देने वाले.को.मैं दुबारा मौका.नहीं देता

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अभी.तक मौजूद.है. इस दिल पर तेरे कदमों.के निसान.हमने .तेरे बाद किसी.को इस.राह से गुजरने नहीं दिया कोई  नहीं आएगा मेरी  जिंदगी में तुम्हारे सिवा एक .मौत .ही है जिसका .मैं वादा .नहीं करता
सपने तो बहुत आए तुम सा कोई सपनों में ना आया फिजा में फूल तो बहुत खिले तुम सब भूल ना मुस्कुराया क्या कशिश थी उसकी आखो में
मत पूछो मुझसे  मेरा दिल लड़ पड़ा मुझे यही चाहिए तुम  रख ना सकोगे मेरा तोहफा संभालकर वरना मैं अभी दे दूं जिस्म से रूह निकालकर जिस  घाव से खून नहीं निकलता समाज  लेना वह जख्म किसी अपनों ने ही दिया है

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नींद में भी. गिरते है मेरी आंख से आंसू नींद. में भी .गिरते हैं .मेरी आंख. से आंसू जब भी तुम ख्वाबों में हाथ छोड़ देती हो

 

मेरी खुशियों की हाथ फैला कर  द्धआ ना कर ये  मेरा दर्द ही हुनर है मेरा इसकी  दोप नकारो

 

दुपट्टे पर पहरे  कीजगे  दरिंदगी  देखने लगी है तब से बाप को बेटी के शादी का नहीं बालकर का भय होने लगा है

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बो सफर बचपन के अब तक याद आते हैं मुझे सोबा जाना हो कहीं तो रात   भर सोते नहीं थे  लब्ज  तो खामोश हो गए हैं तुम  से बात कर ते करते

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Hindi Shayari Gulzar, part4_Best Gulzar Shayari

Hindi Shayari Gulzar

Hindi Shayari Gulzar, part4_Best Gulzar Shayari

उन को अलविदा कहना बड़ा मुश्किल था धड़कनों के रुकने से जान जा सकती थी मेरी

कभी किसी को चुगने वाली बात मत कहिए माफी तो मिल जाएगी पर रिश्ता टूट जाएगा इश्क उसी से करो जिसमें खामियां बेशुमार हो यह खूबियों से भरे चेहरे इतराते बहुत हैं मुझे कहां से आएगा

लोगों का दिल जीतना मैं तो खुद का ही हार कर बैठा हूं,Hindi Shayari Gulzar,

मेरे बदल जाने की वजह मत पूछना आईना देखना और खुद समझ जाना,Best Gulzar Shayari

पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना,Hindi Shayari Gulzar,

जब भी उदास हो तो रो दिया करो क्योंकि चेहरा पढ़ना भूल गई है,Best Gulzar Shayari

लो जरा सी बात पर ना छोड़ना किसी का दामन उम्र बीत जाती है दिल का रिश्ता बनाने में,Best Gulzar Shayari

तरस गए हैं तेरे मुंह से कुछ सुनने को हम प्यार की बात ना सही शिकायत ही कर दो

उसे यह शिकवा के हम उसे समझ ना सके और हमें यह नहीं कि हम जानते हैं बस उसको दे

चाहत है,Hindi Shayari Gulzar,

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तैयार है नए जख्मों के लिए दिल कुछ लोग बड़े अदब से पेश आ रहे हैं बात करूं तो बहस और चुप रहूं तो गुरूर कुछ ऐसे चल रही है मेरी जिंदगी आजकल

मिजाज कुछ अपना ऐसा बना लिया हमने जब भी किसी ने बुरा कहा तो बस मुस्कुरा दिया हमने,Best Gulzar Shayari

एक ही दिन में पढ़ लोगे क्या मुझे मैंने खुद को लिखने में कई साल लगाए हैं,

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Best Gulzar Shayari

हो शायद किसी महंगे खिलौने से थी और मैं एक बेबस बच्चा था उसे देखता ही रह गया जब भी कोई छोटी सी गलती पर तुम्हें छोड़कर चला जाए तो समझ जाना कि मैं तुम्हारा कभी था ही नहीं

खुद को किसी की अमानत समझकर हर लम्हा वफादार रहना यह भी एक इश्क है,Hindi Shayari Gulzar,

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कुछ सोचना चाहिए था उसे हर सितम से पहले मैं सिर्फ दीवाना नहीं था गांधीधाम

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जो बीत गई सो बात गई आने वाला सुनहरा कल है,Best Gulzar Shayari

वह जाकर योजना हाल नहीं पूछ सकते डर है कहीं कहना देगी यह हक तुम्हें किसने दिया कोई भी रिश्ता अधूरा नहीं होता

बस निभाने की चाहत दोनों तरफ होनी चाहिए आज सोचा कि कुछ तेरे सिवा सोचो अभी तक इसी सोच में हूं कि क्या सोचो

गया था मैं तुझसे दूर बहुत कुछ पाने के लिए पर सेवा तेरी यादों के कुछ हासिल ना हुआ जिनको साथ नहीं देना होता वह अक्सर रूठ जाया करते हैं,Hindi Shayari Gulzar,

तेरी बेरुखी ने छीन ली है शारदे मेरी और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गया हूं,Best Gulzar Shayari

हमें खो दोगे तो पछताओगे बहुत आखरी गलती जरा सोच समझ कर करना नहीं मिलेगा तो से कोई हमसा

जा इजाजत है ज़माना आजमा ले काश कि वो लौट आए मुझसे यह कहने कि तुम कौन होते हो,Best Gulzar Shayari

मुझसे बिछड़ने वाले एक मारपीट चली है तुझे चाहते हुए तो आज भी बेखबर है कल की तरह अगर तुम्हारे अपने ही तुमसे दूर तो समझ लेना कि किस्मत को यह मंजूर नहीं था